Kuch Sher-O-Shayri
याद तुम आते रहे इक हूक़ सी उठती रही नींद मुझसे, नींद से मैं भागती छुपती रही रात भर बैरन निगोड़ी चाँदनी चुभती रही आग सी जलती रही, गिरती रही शबनम जो नशे सस्ते हैं उनमें एक याराना भी है इश्क़ महंगा शौक है और उस पे जुर्माना भी है उनसे मिलने जाते-जाते रुक गया ये सोचकर सिर्फ़ जाना ही नहीं लौटकर आना भी है कहीं फिसल न जाऊं तेरे ख्यालों में चलते चलते, अपनी यादों को रोको मेरे शहर में बारिश हो रही है। आँखों में शराब और लबों पे गुलाब रखती है, साहिबा! लाल जोड़े में क्या कमाल लगती है। तारीफ़ करता था मैं उसकी जुल्फों की😘.. मेरे लफ्ज़ कम पड़ गए जब उसने साड़ी पहन ली...🤣😋 आंख खुलते ही याद आ जाता है चेहरा तेरा, दिन की पहली खुशी भी कमाल होती है लगता है कई रातों का जागा था मुसव्विर तस्वीर की आँखों से थकन झाँक रही है तुम हुस्न की ख़ुद इक दुनिया हो शायद ये तुम्हें मालूम नहीं महफ़िल में तुम्हारे आने से हर चीज़ पे नूर आ जाता है मत सवरा करो, तुम हमे तो तुम बिखरे हुए ही लाजवाब लगते हो इस मुलाकात पे चूमे नहीं तुमने होठ ये मुलाकात, मुलाकात नहीं मानी गयी इक नजाकत से उसने मुझे पागल बोला जब मै...